जब भी भारत वर्ष की विरंगनाओ की बात आती है तो Rani Lakshmi Bai (रानी लक्ष्मीबाई) का नाम सबसे पहले आता है।

सन् 1818 में जब अंग्रेज़ों ने पूना पर कब्जा किया, तब बाजीराव पेशवा कानपुर के पास बिठूर आ गए और चिमाजी आप्पा के साथ मोरोपंत काशी आ गए। यहीं पर 19 नवम्बर,  1835 को लक्ष्मीबाई का जन्म हुआ।

इस आघात को गंगाधरराव सहन नहीं कर सके और वे बीमार पड़ गए। उत्तराधिकारी के रूप में उन्होंने अपने सम्बन्धी वासुदेवराव के पुत्र आनन्द को दत्तक ले लिया और उसका नाम दामोदरराव रखा गया। 21 नवम्बर, 1853 को गंगाधरराव का स्वर्गवास हो गया।

31 मई, 1857 का दिन स्वतंत्रता संग्राम के लिए तय किया गया, परन्तु निर्धारित समय से पहले ही 6 मई को बैरकपुर छावनी में विद्रोह की आग भड़क उठी।

‘दुर्गा दल’ नाम से एक स्त्री सैन्यदल भी संगठित था। इस ‘दुर्गा दल’ की प्रमुख झलकारी बाई नामक वीरांगना थीं। इस दल में कुछ महिलाओं को तोप चलाने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था।

स्यूरोज और बिटलाक को भारी फौज देकर झाँसी भेजा। यूरोज़ विद्रोहियों को हराते हुए झाँसी पहुँच गया। रायगढ़, चंदेरी, सागर, वाणपुर आदि को जीतते हुए 23 मार्च, 1858 को उसने झाँसी को घेर लिया।

लेकिन रानी के ही कुछ भ्रष्ट व धोखेबाज़ सरदारों के विश्वासघात के कारण यूरोज़ को इसकी भनक लग गई। अंग्रेजों ने दोनों सेनाओं को मिलने नहीं दिया और रास्ते में तात्या टोपे की सेना पर आक्रमण कर दिया।

रानी लक्ष्मीबाई, भाई रावसाहब पेशवा और तात्या टोपे ने मिलकर ऊडाई अंग्रेजो की धज्जिया 

दीवान ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेक दिए। परन्तु ग्वालियर की प्रजा और सेना ने रानी लक्ष्मीबाई का स्वागत किया। इधर ग्वालियर में रावसाहब पेशवा ने अपना राजतिलक करवाया, उधर रानी लक्ष्मीबाई अपने सरदार व स्त्री सैनिकों के साथ मिलकर युद्ध की तैयारी कर रही थीं।

रानी लक्ष्मीबाई की तलवार के सामने जब अंग्रेज़ों की एक न चली तब उन्होंने तोपों से हमला करना शुरू किया, जिससे लक्ष्मीबाई के घोड़े की एक टाँग टूट गई। अब उन्हें अड़ियल घोड़े का सहारा लेना पड़ा। रानी के अधिकतर कुशल सैनिक तोपों की आग में बलि चढ़ चुके थे।

सर्वश्रेष्ठ योध्दा रानी लक्ष्मीबाई की मौत (when and how was rani Lakshmi Bai died)

सर्वश्रेष्ठ योध्दा रानी लक्ष्मीबाई की मौत (when and how was rani Lakshmi Bai died)  18 जून, 1858 का वह दिन था जब रानी लक्ष्मीबाई आखिरी श्वास तक अपने देश के लिए लड़ती रहीं और वीरगति को प्राप्त हो गईं।

भारत के अनेक वीर क्रांतिकारी देश की खातिर बलिदान हो गए। कुछ नाम शेष रह गए तो कुछ अज्ञात रहे। लेकिन ‘खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झाँसी वाली रानी थी।

भारत की सर्वश्रेष्ठ योध्दा रानी लक्ष्मीबाई। Biography, War, birth, 1857 fight |  Complete Story given here--- in Hindi Read more