Prithviraj Chauhan history in Hindi । पृथ्वीराज चौहान का इतिहास, कहानी, कथा, जीवन परिचय, वंशज और 02 युध्द ।

Prithviraj Chauhan history in Hindi पृथ्वीराज चौहान का इतिहास, कहानी, कथा, जीवन परिचय, वंशज, संयोगिता, प्रेम कहानी, जयंती, जन्म, मृत्यु कैसे हुई, बेटे, बेटी, मित्र (Prithviraj Chauhan history and  Biography in Hindi) (, Wife, Sanyogita, Kahani, Birth, Death, Reason, Friend,

नमस्कार दोस्तो इस लेख मे हम Prithviraj Chauhan history in Hindi, और उनके जीवन के संघर्षो और उनके द्वारा लडे गए युध्दो के बारे मे चर्चा करेंगे। जानेगे कि उन्होने हमारे देश और समाज के लिए कितने महान कार्य किए। ये पूरी जानकारी Hindi भाषा मे होगी। prithviraj chauhan history in hindi पूरी सत्य है।

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पृथ्वीराज चौहान का इतिहास (Prithviraj Chauhan History in Hindi)

पृथ्वीराज चौहान का इतिहास (Prithviraj Chauhan History in Hindi)– पृथ्वीराज चौहान का जन्म एक क्षत्रिय वंश मे 01 जून 1163 मे भारत के गुजरात राज्य के  पाटण नामक स्थान पर हुआ। पृथ्वीराज चौहान भारत के वीर योध्दाओ मे से एक थे। इन्होंने अपने जीवन काल मे अनेको युध्द लडे और उनमे विजय पाप्त की। सारे राजपूत राजा दिल्ली सम्राट पृथ्वीराज चौहान का गुणगान किया करते थे।

पूरा नामपृथ्वीराज चौहान
अन्य नामभरतेश्वर, पृथ्वीराज तृतीय, हिन्दूसम्राट
व्यवसायक्षत्रिय
जन्मतिथि1 जून, 1163
जन्म स्थानपाटण, गुजरात, भारत
मृत्यु तिथि11 मार्च, 1192
मृत्यु स्थानअजयमेरु (अजमेर), राजस्थान
उम्र (Life)43 साल
आयु (Age)28 साल
राष्ट्रीयताभारतीय
धर्म (Religion)हिन्दू
वंशचौहानवंश
वैवाहिक स्थितिविवाहित
पराजयमुहम्मद गौरी से
Prithviraj Chauhan history in Hindi

जयचन्द को यह सब पसंद नहीं था। पृथ्वीराज चौहान को नाच दिखाने के लिए उसने अपनी पुत्री के स्वयंवर का आयोजन किया। सारे राजपूत राजाओं तथा राजकुमारों को स्वयंवर समारोह में बुलाया लेकिन पृथ्वीराज चौहान को न्यौता नहीं दिया। पृथ्वीराज चौहान को अपमानित करने हेत उनकी आदत प्रतिमा बनवाकर जयचन्द ने स्वयंवर मण्डप के बाहर खड़ी कर दी।

पृथ्वीराज चौहान का जन्म, परिवार एवं शुरूआती जीवन (Prithviraj Chauhan Birth, Family, Early Life)

पृथ्वीराज चौहान, सम्राट पृथ्वीराज चौहान सोमेश्वर के पुत्र थे। उनकी माता का नाम कर्परी देवी था। जिस समय उनके पिता की मृत्यु हुई, उस समय पृथ्वीराज अवयक थे। राजा सोमेश्वर चौहान के बाद उनका शासन कर्पूरी देवी अर्थात् पृथ्वीराज चौहान की माता ने सँभाला।

जब पृथ्वीराज चौहान वयस्क हुए, तब सन् 1180 ई. में उन्होंने अपने पिता के शासन की बागडोर सँभाली।ठीक इसी समय चौहान वंशीय राजा विग्रहराज चतुर्थ के पुत्र नागार्जन ने पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ विद्रोह कर दिया।

पितासोमेश्वर
माताकर्पूरदेवी
भाईहरिराज (छोटा)
बहनपृथा (छोटी)
पत्नी13
बेटागोविंद चौहान
बेटीकोई नहीं
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पृथ्वीराज चौहान का दिल्ली पर शासन[Prithviraj chauhan history in hindi]

पृथ्वीराज चौहान ने अपनी वीरता और युध्द कौशलता के बल पर अपने शासन को सम्पूर्ण फैलाया हुआ था। पृथ्वीराज चौहान का शासन दिल्ली से अजमेर तक फैला हुआ था। उनके शासन काल मे उनके खिलाफ कोई विद्रोह नही होता था। उन्होंने नागार्जुन के विद्रोह को सफलतापूर्वक दबा दिया।

पृथ्वीराज चौहान का विवाह राजकुमारी संयोगिता से [Prithviraj chauhan history in hindi]

पृथ्वीराज चौहान का विवाह prithviraj chauhan history in hindi का ही एक हिस्सा है। भी युवावस्था में पृथ्वीराज चौहान राजकुमारी संयोगिता के रूप-सौंदर्य पर मोहित हो गए। वे कन्नौज नरेश जयचन्द की पुत्री संयोगिता से बहुत प्रेम किया करते थे और संयोगिता से विवाह करना चाहते थे लेकिन जयचन्द इस विवाह के लिए राजी नहीं था।

वह पृथ्वीराज चौहान की ख्याति देखकर जलता था। जयचन्द अपनी नजर में स्वयं को शक्तिशाली राजा समझता था तथा दिल्ली पर आक्रमण करके दिल्ली के राज्य को कन्नौज में मिला लेना चाहता था।

उसने कई बार दिल्ली को जीतने का प्रयास किया लेकिन पृथ्वीराज चौहान के होते वह अपने प्रयासों में सफल न हो सका। उस समय सारे राजपूत राजा दिल्ली सम्राट पृथ्वीराज चौहान का गुणगान किया करते थे। जयचन्द को यह सब पसंद नहीं था।

पृथ्वीराज चौहान को नाच दिखाने के लिए उसने अपनी पुत्री के स्वयंवर का आयोजन किया। सारे राजपूत राजाओं तथा राजकुमारों को स्वयंवर समारोह में बुलाया लेकिन पृथ्वीराज चौहान को न्यौता नहीं दिया। पृथ्वीराज चौहान को अपमानित करने हेत उनकी आदत प्रतिमा बनवाकर जयचन्द ने स्वयंवर मण्डप के बाहर खड़ी कर दी।

 तब पृथ्वीराज चौहान ने अपने बचपन के मित्र तथा राजकवि चन्द्रवरदाई की मदद से संयोगिता को स्वयंवर मण्डप से भगाकर ले गए तथा दिल्ली पहुँचकर विधिवत रूप से संयोगिता से विवाह कर लिया।

इसे जयचन्द राजा ने अपना अपमान समझा। अपने अपमान का बदला लेने के लिए जयचन्द ने गजनी शासक मुहम्मद गौरी को दिल्ली पर आक्रमण करने का निमंत्रण दिया।

पृथ्वीराज चौहान द्वारा लडे गए युध्द (War Fought by Prithiviraj Chauhan)

पृथ्वीराज चौहान ने अपने जीवन और पूरे शासनकाल मे अनेक युध्द लडे और असाधारन वीरता का परिचय देते हुए जीत हासिल की। राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान के द्वारा लडे गए युध्दो का वर्णन इस प्रकार है।

तराइन का पहला युद्ध [first war of Tarain]

सन् 1191 ई. में पृथ्वीराज चौहान की राजपूत सेना तथा मुहम्मद गौरी की तुर्क सेना में जमकर युद्ध हुआ। यह युद्ध तराइन के ऐतिहासिक मैदान में लड़ा गया। मुस्लिम इतिहासकार फ़रिश्ता के अनुसार, उनकी सेना में 200,000 घोड़े और 3,000 हाथी शामिल थे।

मुहम्मद की मूल योजना तबरहिंदा को जीतकर अपने अड्डे पर लौटने की थी, लेकिन जब उन्होंने पृथ्वीराज के मार्च के बारे में सुना, तो उन्होंने लड़ाई करने का फैसला किया। वह एक सेना के साथ निकला, और तराइन में पृथ्वीराज की सेना का सामना किया।

इस युद्ध में सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गौरी को बुरी तरह हराया।

तराइन का पहला युद्ध [Second war of Tarain, Prithviraj chauhan history in hindi]

पृथ्वी राज चौहान 1191 में तराइन की पहली लड़ाई के दौरान, मुहम्मद गोरी गजनी लौट आया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से शर्मसार किया और अपनी सेना के कमांडरों और कमांडरों को बर्खास्त कर दिया, जिन्होंने तराइन में कायरता दिखाई और अपनी हार का बदला लेने तक सभी विलासिता को त्यागने का संकल्प लिया। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने गोलाबारी, गतिशीलता और अनुशासन पर अधिक जोर देते हुए अपनी सेना के पुनर्निर्माण के बारे में सोचा।

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पृथ्वी राज चौहान इस बीच तराइन में अपनी जीत से उत्साहित थे। यह मानते हुए कि उन्होंने अपनी सेना की श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया है, उन्होंने अपनी सीमाओं को मजबूत करने की उपेक्षा की, हालांकि उन्होंने पड़ोसी राज्यों को प्रस्ताव भेजे ताकि एक बड़ी सेना को मैदान में उतारा जा सके, अगर घुरिद नए सिरे से प्रयास करें।

1192 की गर्मियों में, मुहम्मद गोरी ने 52,000 घुड़सवारों की सेना के साथ मार्च किया, जो घुरिद सेना की सेना का लगभग आधा था। जब वे पेशावर पहुंचे तो उन्होंने फैसला किया कि अपने बर्खास्त कमांडरों को माफ करना समझदारी होगी और उनसे अपनी सेना में फिर से शामिल होने के लिए कहा, जो उन्होंने किया।

गौरी ने तराइन के मैदान में पृथ्वीराज चौहान की सेना से युद्ध लड़ा और रात को धोखे से राजपूत छावनी पर आक्रमण करके पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया। This is all about Prithviraj Chauhan history in Hindi.

पृथ्वीराज चौहान की मौत [Death of Prithiviraj Chauhan]

गौरी ने पृथ्वी राज और उसके मित्र चन्दबरदाई को बंदी बनाया तथा गजनी ले जाकर उन्हें कारागार में बंद कर दिया। एक दिन पृथ्वीराज चौहान ने शब्दभेदी बाण चलाकर गौरी को मार डाला। बाद में स्वयं तथा मित्र चन्दबरदाई ने भी मौत को गले लगा लिया।

निष्कर्ष [Conclusion]

तो दोस्तो अपने इस लेख मे पृथ्वीराज चौहान के इतिहास के बारे मे हिंदी मे पढा (Prithviraj Chauhan history in Hindi) | और जाना की उन्होने अपने जीवन काल मे कितने युघ्द लडे। यहा से हमे पता चलता है कि पृथ्वीराज चौहान राजपूत इतिहास (History) के कितने वीर योध्दा थे।

आशा करता हु कि आपको ये लेख पसंद आया होगा। अगार अपको Prithviraj chauhan history in hindi पसंद आया हो तो इसे आप अपने दोस्तो के साथ जरुर सेयर करे।

FAQ

Q. पृथ्वीराज चौहान कौन सी समाज के थे?

Ans. पृथ्वीराज चौहान एक राजपूत (Rajpoot, क्षत्रिय, चौहान) समाज के राजा थे।

Q. मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच कितने युद्ध हुए?

Ans. मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच दो युद्ध हुए थे। पहला 1191 और दूसरा 1192 मे।

Q. पृथ्वीराज ने मोहम्मद गौरी को कैसे मारा था?

Ans. एक दिन पृथ्वीराज चौहान ने शब्दभेदी बाण चलाकर गौरी को मार डाला। बाद में स्वयं तथा मित्र चन्दबरदाई ने भी मौत को गले लगा लिया।

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